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मार डालो हर जिस्म के व्यापारी को तनहा शायर हूँ मयस्सर रूबरू तनहा शायर हूँ मुसाफिर गाँव शहर तनहा शायर हूँ अब रोता क्यों है तनहा शायर हूँ कोई ख्वाब मुकम्मल नज़र तनहा शायर हूँ खुदा कर्म काव्य सरिता शायर हूँ दिवाना ए राहगीर

Hindi व्यापारी कोतनहा शायर हूँ Poems